Motivational Story on Swarthi Mitra कहानी स्वार्थी मित्र

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Motivational Story on Swarthi Mitra कहानी स्वार्थी मित्र

हैलो दोस्तों। कहानी संसार में आज की कहानी स्वार्थी लोगों से सम्बन्धित है। स्वार्थी व्यक्ति जीवन में कभी सच्चे मित्र नही बनाते है और इसी प्रकार स्वार्थी लोग भी सदा मित्रहीन ही रहते है।
आज की कहानी Motivational Story on Swarthi Mitra कहानी स्वार्थी मित्र इसी से जुड़ी हुई है।

यह एक प्राचीन लोककथा है। एक बार जंगल के पशु-पक्षियों में विवाद हो गया। पशुओं का कहना था कि वे अधिक ताकतवर है क्योंकि उनको ईश्वर ने अपनी रक्षा और भोजन के लिए सींग और नाखून दिये है। जिससे वो पक्षियों को भी हरा सकते है।

पक्षियों का कहना था कि वो ज्यादा ताकतवर है। वो अपने पंखो की सहायता से उड़कर किसी भी पशु से बचकर रह सकते है। वे धरती पर तो रहते ही है पर आसमान की ऊँचाइयों को भी छू सकते है।

इसी प्रकार बहुत देर तक वाद विवाद चलता रहा। दोनो पक्ष अपनी अपनी खूबियां बता रहे थे और दूसरे पक्ष की कमजोरियां बता रहे थे। दोनो पक्षों के मध्य यह तर्क वितर्क शीघ्र ही संघर्ष में बदल गया। निर्णय करने वाला या सुलह करने वाला कोई नही था। इसलिए दोनो पक्षों में युद्ध प्रारम्भ हो गया।

दूर पेड़ पर बैठे बैठे चमगादड़ का परिवार भी यह सब देख रहा था। लेकिन वो इस बहसबाजी में नही उलझे थे। चमगादड़ के सबसे छोटे बच्चे ने चमगादड़ के पूछा कि पिताजी हम किसका साथ देंगे ? पशुओं का या पक्षियों का ?

चमगादड़ ने कहा – ‘अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। हम उस पक्ष का ही साथ देंगे जो जीतेगा। तभी हमे फायदा होगा।’

‘पर वो कैसे पिताजी ?’- चमगादड़ के बच्चे ने उत्सुकता से पूछा।

चमगादड़ ने मुस्कुराते हुए कहा – देखो हम पक्षियों की तरह आसमान में उड़ते है इसलिए हम पक्षियों में शामिल हो सकते है। दूसरी ओर हमारे पक्षियों की तरह पंख नही होते है और ना ही हम अंडे देते है, हम स्तनपायी जीव है। तो हम पशुओं में भी शामिल हो सकते है। इसलिए अभी युद्ध चलने दो जो पक्ष जीतेगा हम उसी पक्ष में शामिल हो जाएंगे।
स्वार्थी चमगादड़ की बातों से बाकी चमगादड़ भी सहमत हो गए।

कोयल और हिरन उसके परम मित्र थे। कुछ समय बाद चमगादड़ को चुपचाप बैठा देखकर कोयल उन्हे बुलाने आई पर वे उनके साथ नही गए।

कुछ देर बाद हिरन भी उन्हे अपने पक्ष में शामिल होने के लिए बुलाने आया पर फिर भी वे नही गए। क्योंकि वे किसी एक की मित्रता के चक्कर में खुद का नुकसान नही करवाना चाहते थे। इसलिए चुपचाप बैठै बेठै वे उनका यु़द्ध देखते रहे।

एक समय लगा कि पशु बस हारने ही वाले है। तो चमगादड़ पक्षी दल में शामिल हो गए। लेकिन कुछ समय बाद शेर के आते ही पशुओं का पलड़ा भारी हो गया। पशुओं को जीतते देख चमगादड़ पक्षी दल को छोड़कर पशु दल में शामिल हो गया।

लेकिन कुछ समय बाद ही कईं छोटे छोटे पक्षियों ने युद्ध में शामिल हो कर युद्ध की दिशा पुनः मोड़ दी। अंतत किसी भी पक्ष की न जीत हुई और ना ही हार हुई। दोनो पक्षों में संधि हो गई। और दोनो ही पक्षों ने आपस में संधि कर ली।

इस प्रकार पशु और पक्षी की तो मित्रता हो गई। किन्तु चमगादड़ों का स्वार्थी स्वभाव उन्होंने समझ लिया था। जब वे चमगादड़ भी दोनो पक्षों से मित्रता करने के लिए आए तो पशुओं ने कहा कि तुम तो पक्षी हो जाओ। उनसे मित्रता करो।

जब वे पक्षियों के पास गए तो उन्होंने कहा तुम तो स्तनधारी जीव हो। जाओ। पशुओं के पक्ष में जाओ।

चमगादड़ तब पक्षियों के राजा गरूड़ और जंगल के राजा शेर के पास गया। और उनसे न्याय करने की बात कही।

तब गरूड़ ने कहा कि तुम जैसे स्वार्थी किसी के मित्र नही हो सकते हो। जब जिससे तुम्हारा स्वार्थ पूरा होता दिखेगा, तुम उसी के मित्र बन जाओगे। ऐसे स्वार्थी जीव को हम अपने साथ नही रख सकते है।

शेर ने कहा – ‘ सभी से चर्चा करने के बाद हम तुम्हारा जंगल से बहिष्कार करते है। अब से कोई भी पशु या पक्षी तुम्हारा मित्र नही है। और हम तुम्हे देखना भी नही चाहते है। इसलिए जंगल छोड़ के चले जाओ।’

कहा जाता है कि तभी से चमगादड़ हमेशा सबसे छुपकर अंधेरे कोटरो, पुराने  मकान और सुनसान जगह पर रहने लगे। क्योंकि उनका कोई मित्र नही है। वे शाम के धुंधलके में ही अपने कोटरों से बाहर निकलते है। जब सारे पक्षी अपने घरों की और लौट चुके होते है।

Motivational Story on Swarthi Mitra कहानी स्वार्थी मित्र
Motivational Story on Swarthi Mitra कहानी स्वार्थी मित्र

जीवन में मित्र होना आवश्यक है। बिना मित्रों के जीवन अधूरा है। परन्तु जीवन में स्वार्थी मित्रों से दूर रहना भी उतना ही आवश्यक  है। एक स्वार्थी मित्र से वफादार शत्रु को अधिक श्रेष्ठ माना गया है।

स्वार्थी व्यक्ति अपने स्वार्थ के अनुसार ही मित्र बनाता है और स्वार्थ पूरा होते ही भूल जाता है| जिससे स्वार्थ हो उसके लिए वह अपना सारा समय देता है|

परन्तु जिससे उसे स्वार्थ नहीं है, उसको वो कभी पूछता नहीं है| लेकिन अगर उसी व्यक्ति  से उसे कोई स्वार्थ पूरा करना हो तो वो अपने बातो की मिठास से काम लेते हुए  अपना काम निकाल लेता है |

समय रहते हुए ऐसे स्वार्थी लोगो को पहचानिए | और अगर आपके अन्दर ऐसा गुण है तो उसे अपने से दूर कीजिये | क्योंकि स्वार्थी व्यक्ति एक दिन सच्चे मित्रो के लिए तरस जाता है| और अकेला ही रह जाता है|

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नोट – यहां साझा की गई यह कहानी Motivational Story on Swarthi Mitra कहानी स्वार्थी मित्र मेरी मूल रचना नहीं है। मैंने इसे पहले पढ़ा है या सुना है और मैं कुछ संशोधनों के साथ ही इसका एक हिंदी संस्करण प्रदान कर रहा हूं। मेरा मूल उद्देश्य कहानियो के माध्यम से समाज को प्रेरित करना और अपने पाठको का मनोरंजन करना है|

 

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