hindi motivational story proud is harmful अहंकार बना मृत्यु का कारण

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Hindi Motivational Story Proud is Harmful अहंकार बना मृत्यु का कारण

कभी कभी जीवन में हम केवल अपने एक दुर्गुण के कारण ही स्वयं का नुकसान करवा लेते है| अहंकार एक ऐसा ही दुर्गुण है | आज की कहानी hindi motivational story proud is harmful अहंकार बना मृत्यु का कारण में आज हम इसी के बारे में जानेंगे कि किस तरह एक व्यक्ति जिसमे बहुत से गुण थे लेकिन अपने एक दुर्गुण अहंकार के कारण उसे मृत्यु का सामना करना पड़ा| ये कहानी आपको सच में बहुत अच्छी सीख  देगी|

एक बार एक  नगर में वहां के मुखिया का निधन हो गया सब लोगों ने विचार किया कि गांव में व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी वीर  बुद्धिमान और गुणवान व्यक्ति को ही गांव का मुखिया नियुक्त करना चाहिए| इसके लिए गांव के लोगों ने मिल जुलकर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया और इस प्रतियोगिता में सफल होने वाले व्यक्ति को ही गांव का मुखिया बनाने का निर्णय लिया गया| गांव के अधिकतर लोग इस प्रतियोगिता में शामिल हो कर मुखिया बनना चाहते थे|

सबसे पहले ज्ञान की परीक्षा थी जिसमें गांव के कुछ युवा और कुछ वृद्ध व्यक्ति जीत गए| इसके बाद शक्ति की परीक्षा दी जिसमें गांव के युवा लोग जीत गए| इसके बाद में में बुद्धि की परीक्षा थी जिसमें  गांव के कुछ युवा लोग ही जीत पाए|

 उनमें राजेंद्र  नामक व्यक्ति बहुत ही  अहंकारी था और निरंतर हर प्रतियोगिता में सफल होने के कारण उसमें और अधिक अहंकार आ गया था |

इस कारण जब प्रतियोगिता के अंत में दो ही व्यक्ति शेष रहे तो उसने अपने अभिमान का परिचय देना शुरू कर दिया| वह अपने सामने वाले  प्रतिद्वंदी महेश से भला बुरा कहने लगा और स्वयं की प्रशंसा में शब्द कहने लगा|

जब गांव के लोगों ने उसे समझाया तो वह उनसे भी वाद-विवाद करने लगा और कहने लगा कि तुम में से कोई भी व्यक्ति मुझसे ना लड़ाई में ना ज्ञान में और ना बुद्धि में जीत सका तो फिर तुम किस मुंह से मुझसे बात कर रहे हो अब गांव का मुखिया तो  मैं ही बनूंगा|

गांव के लोगों ने कहा कि ठीक है| तुम गांव की मुखिया बन जाना परंतु उससे पहले अंतिम  प्रतियोगिता में सफल हो जाओ| अंतिम प्रतियोगिता में घोड़े पर बैठकर गांव के बाहर से एक पेड़ का फल तोड़कर लाना था|

तब उस व्यक्ति ने अपना घोड़ा दौड़ाया और गांव  से बाहर निकल पड़ा | पीछे पीछे महेश भी आ रहा था |

घोड़ा दोडाते समय  राजेंद्र ने पीछे मुड़कर देखते हुए महेश से कहा कि तुम चाहे कितना ही प्रयत्न कर लो |तुम मुझे जेसे वीर और तेजस्वी युवक का सामना नहीं कर सकते हो | तुम असफल हो गए| तुम्हें मुझ से प्रतिस्पर्धा का मार्ग छोड़ देना चाहिए|

तब महेश ने कहा कि तुम्हें मुझ से ज्यादा अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए | इस समय तुम्हारा काम ठीक प्रकार से घोड़े को दौड़ाना है| तुम उस पर ध्यान दो |

तब  राजेंद्र ने कहा कि मुझे घुड़सवारी का 10 साल का अनुभव है| मैं बचपन से ही घुड़सवारी करना जानता हूं तुम मुझे कुछ मत सिखाओ लेकिन तभी अचानक एक गड्ढा आया और राजेंद्र का घोड़ा उसके कारण असंतुलित होकर गिर पड़ा|

साथ में राजेंद्र भी गिर पड़ा उस समय महेश आगे निकल गया था परंतु फिर भी वह पुनः वापस लौटा|

उसने राजेंद्र की मदद करने का प्रयास किया परंतु जब महेश राजेंद्र के पास गया तो उसने उसे धक्का देते हुए कहा कि मेरी मदद करने की कोई आवश्यकता नहीं है|

मैं स्वयं अपनी मदद कर सकता हूं और तुम चाहे कुछ भी कर लो| मुखिया तो मैं ही बनूंगा और यह कहकर उसने शीघ्रता से घोड़ा संभाला और पुनः उस पर बैठ कर चल दिया| महेश भी उसके साथ ही चल रहा था|

इसके बाद  जो पेड़ निश्चित किया था |वहां पहुंचने के बाद राजेंद्र उस पेड़ के पास जाकर खड़ा हो गया और महेश का इंतजार करने लगा|

महेश ने वहां पहुंचने के बाद कहा कि क्या हुआ ? राजेंद्र तुमने फल क्यों नहीं तोडा ? तब राजेंद्र ने अपने अभिमान का पुनः परिचय देते हुए कहा कि हम उच्च कुल और अमीर खानदान से हैं |

हम ऐसे छोटे-छोटे कार्य नहीं करते जाओ और मेरे लिए फल तोड़कर लाओ| यह प्रतियोगिता फल गांव तक पहुंचाने की है ना कि पेड़ पर चढ़कर फल तोड़ने कि तुम फल तोड़ो और मुझे दो वरना मैं तुम्हारा यही अंत कर दूंगा |

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महेश ने कहा कि तुम हमेशा लड़ने के लिए क्यों तैयार रहते हो ? मैंने तुमसे मना तो नहीं किया| ठीक है| तुम कह रहे तो मैं फल तोड़ देता हूं ,पर मुझे नहीं लगता इस प्रकार से तुम एक अच्छे मुखिया बन पाओगे|

तब राजेंद्र ने कहा अरे मूर्ख तू नहीं जानता हमारे पास कितना सोना चांदी रखा हुआ है ? हम कितने अमीर व्यक्ति हैं ? मेरी जेब में हमेशा बहुत सी स्वर्ण मुद्राएं भरी हुई रहती हैं और जिन्हें में कभी भी कहीं भी खर्च कर देता हूं और तुम क्या सोचते हो मैं तुम जैसे लाखों गरीब को मैं यूं ही खरीद सकता हूं  ?

उसकी यह बात सुनकर महेश ने कहा कि मैं भले ही गरीब हूं|  घर में ठीक प्रकार से भोजन भी हमें प्राप्त नहीं होता है| पर मेरे मुखिया बनने का उद्देश्य धन संपत्ति का अर्जन करना नहीं अपितु पूरे गांव की सेवा करना और अपने गांव का विकास करना है|

उसकी इस बात पर राजेंद्र हंसने लगा और बोला- हां पर गांव की सेवा करना| तुम्हारे भाग्य में नहीं है |अब चलो ज्यादा देर मत करो और मेरे लिए पेड़ से फल तोड़ कर लाओ |

जिस समय राजेंद्र और महेश यह बातें कर रहे थे| उसी समय वहां पर कुछ लुटेरों का समूह भी था| जब उन्होंने राजेंद्र की अहंकार से भरी ये बड़ी बड़ी बातें सुनी तो उन्होंने उसी समय राजेंद्र पर हमला करने का सोचा| जब महेश पेड़ पर चढ़ गया| उसके बाद वे आए और राजेंद्र से बोले हैं तुम्हारे पास जितना भी धन दौलत सोना चांदी जेब में रखा हुआ है| वह हमें दे दो

तब राजेंद्र ने कहा कि नहीं मेरे पास कुछ भी नहीं है|

तब उन्होंने कहा कि हमने तुम्हारी सारी बात सुन ली थी | अधिक देर मत करो और चुपचाप अपने पास जो भी है| वह हमें  सौंप दो |

राजेंद्र ने कहा- नहीं मैं यह सब इतनी आसानी से तुम्हें नहीं दूंगा |तुम जानते हो मैं इस गांव का बनने वाला नया मुखिया हू

लुटेरों ने कहा कि तुम्हारे पास जो है| दे दो वरना अपनी जान से हाथ धो बैठोगे |

राजेंद्र  ने उनकी इस बात पर ध्यान नहीं दिया और वह अपनी जेब से कटार निकालने की कोशिश करने लगा | तब एक लुटेरे ने उसके सिर पर वार किया और राजेंद्र वही गिर गया| उन्होंने जल्दी से राजेंद्र की तलाशी ली सच में उसके पास कुछ सोने के सिक्के थे| चोरों ने उससे वह छीने और वहां से चल दिए क्योंकि उनकी बातों से चोरों ने अंदाजा लगा लिया था कि महेश के पास कुछ नहीं होगा इसलिए उन्होंने उससे कुछ नहीं कहा|

महेश उनसे लड़ने के लिए आने लगा तो उन्होंने कहा – हमारा काम लूट पाट करना है, पर हम कभी गरीब को नहीं लूटते| तुम्हारे दोस्त ने अपनी करनी का फल पाया है | और तुम अकेले हम से लड़ कर जीत भी नहीं सकते इसलिए चुपचाप शांति से यहाँ से जाओ|

महेश उनसे लड़ना चाहता था पर उनकी एक एक बात सच थी | लुटेरो के जाने के बाद उसने राजेंद्र को देखा उसे होश में लाने का प्रयास किया| लेकिन राजेंद्र मर चुका था| वह उसकी लाश को लेकर गांव पहुंचा और गांव वालों को सारी बात बताई| तब गांव वालों ने बोला कि इसका तो अंत ही होना था जो व्यक्ति अहंकार में चूर हो जाता है| वह अपने अभिमान के सामने किसी को अपने बराबर समकक्ष भी नहीं समझता है| उसका यही हाल होता है| ऐसा व्यक्ति जानबूझकर अपनी मुसीबत को खुद ही बुला लेता है| राजेंद्र  की हत्या लुटेरों ने नहीं बल्कि राजेंद्र के अहंकार और अभिमान ने की है|

इसके बाद गांव महेश को ही गांव का मुखिया बना दिया|

यह कहानी सच में बहुत बड़ी सीख दी जाती है| हमारे जीवन में भी अहंकार के कारण इसी प्रकार हम असफल हो सकते हैं| राजेंद्र ने अपने लक्ष्य से अधिक अपने अहंकार को अधिक बल दिया जिसके कारण ही उसके जीवन का अंत हुआ |इसलिए यदि हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति करना तो हमें अपने जीवन में से अहंकार और अभिमान की भावना का परित्याग कर देना चाहिए| तब जाकर ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं|

 अहंकार मनुष्य के जीवन का एक बहुत बड़ा दुर्गुण है| अहंकार के कारण व्यक्ति अपने को अन्य व्यक्तियों से अधिक शक्तिशाली बुद्धिमान मानने लग जाता है|

अहंकार के कारण व्यक्ति में पाप प्रवृत्तियां प्रबल होती हैं वह ना करने योग्य कार्य करने लगता है| जिस व्यक्ति में अहंकार अभिमान है, उसे यह लगता है कि दुनिया में सबसे अधिक बुद्धिमान मैं ही हूं|  मैं ही परम ज्ञानी हूं| अहंकार या अभिमानी व्यक्ति में यह भावना लाता है कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है|

मुझे किसी की कोई आवश्यकता नहीं है| अहंकारी या अभिमानी व्यक्ति दूसरों को नीचे गिरा कर ही आगे बढ़ने के बारे में सोचता रहता है|

आपने बचपन में कछुए और खरगोश की कहानी जरूर सुनी होगी| कछुआ जहां हमें निरंतर कर्म करने की प्रेरणा देता है|

वही खरगोश हमें जीवन में आलस्य न करने और अहंकार को छोड़ देने की सीख भी देता है| क्योंकि  खरगोश में यह अहंकार आ गया था कि वह कछुए जैसे धीरे धीरे चलने वाले जीव को तो यूं ही हरा सकता है|

इसलिए वह बीच रास्ते में ही आराम करने के लिए रुक जाता है| यदि उसमें अभिमान ना होता तो शायद वह जीत जाता |

हम भी अपने जीवन में कहीं बाहर अहंकार के वशीभूत होकर इसी प्रकार काम करते हैं और असफल हो जाते हैं|

अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें अपने जीवन में अभिमान या अहंकार के दुर्गुण को त्याग देना चाहिए| तभी हम सफल हो सकते हैं|

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नोट – यहां साझा की गई यह कहानी hindi motivational story proud is harmful अहंकार बना मृत्यु का कारण मेरी मूल रचना नहीं है। मैंने इसे पहले पढ़ा है या सुना है और मैं कुछ संशोधनों के साथ ही इसका एक हिंदी संस्करण प्रदान कर रहा हूं। मेरा मूल उद्देश्य कहानियो के माध्यम से समाज को प्रेरित करना और अपने पाठको का मनोरंजन करना है|

 

 

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