best horror story hindi purani haweli ka raaz part 3 (पुरानी हवेली की राज़ भाग 3)

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best horror story hindi purani haweli ka raaz part 3 (पुरानी हवेली की राज़ भाग 3)

इस कहानी को समझने के लिए  कहानी का पहला भाग यहाँ click कर के जरुर पढ़े – best horror story hindi purani haweli ka raaz Part 1

कहानी का दूसरा  भाग यहाँ click कर के पढ़ सकते है – best horror story hindi purani haweli ka raaz Part 2 

पिछले दो भागों में आपने पढ़ा कि गाँव के कुछ बच्चे आपस में भूत प्रेत की बाते करने में लगे हुए थे जिसमें रानो और चंदू को भूत प्रेत पर विश्वास नहीं था| गाँव में एक टीले के पीछे एक हवेली थी| सबका मानना था कि उसमें भूत है| तब रानो ने कहा कि भूत कुछ नही होते और मैं उस हवेली का राज़ पता कर के रहूंगी| और इस बात पर सोनू ने कहा कि रानो अकेली नहीं जाएगी सब उसके साथ जायेंगे| इस बात से सभी डर गये थे आगे क्या हुआ जानने के लिए पढ़िए –best horror story hindi purani haweli ka raaz part 3 (पुरानी हवेली की राज़ भाग 3)

उस दिन का मंजर याद करके डर तो सोनू और बाकी सब भाईयों को भी लग रहा था। क्योंकि दीनू ने जिस अंदाज में कहानी सुनाई थी वो सारा मंजर जैसे दुबारा उनकी आंखों के सामने घटा हो। इस तरह ताजा हो गया था। पर बहन की बात का मान रखना भी जरूरी था। क्योंकि वो एक ऐसे परिवार में थे जिसमें आपसी प्यार बहुत ज्यादा था। चाचा, ताऊ, बुआ सभी के बच्चे सगे भाई-बहनों की तरह रहते थे। इसलिए अपनी बहन को वो ऐसी किसी भी जगह पर अकेले भेज कर मुसीबत मोल नही लेना चाहते थे।

चन्दू को छोड़ सब जहां सोच रहे थे कि रात धीरे धीरे गुजरे वहीं रानो सोच रही थी कि कब सुबह हो ? और वो उस हवेली का राज पता कर के आए।

डर, खौफ और बैचेनी में सबकी रात गुजरी। सुबह अपनी दिनचर्या से मुक्त होकर ताऊजी के बाड़े के पीछे एकदम शांत, सुनसान जगह पर सब इकट्ठे हुए और वहां जाने की योजना बनाने लगे।

शाम को 5 बजे खेलने के बहाने घर से बाहर निकलने की योजना बनी। रानो ने हवेली का राज पता करने के लिए कुछ सामान साथ ले चलने को कहा। जिसमें पानी की बोतल, दो लाठी, माचिस, गुलेल, चाकू और रस्सी साथ ले चलने को कहा।

रानो के अलावा किसी को पता नही था कि ये सब सामान साथ ले चलने को क्यों कहा ? सारे भाई दिमाग लगा रहे थे कि अगर वहां भूत हुआ तो क्या इन सब सामानों से पकड़ में आएगा ? या डर के भाग जाएगा।

पर रानो ने एक जवाब देकर सब को चुप कर दिया कि हम जहां जा रहे है, वहां जाने पर पता चल जाएगा कि ये सब चीजे काम आएंगी भी या नही। हो सकता है किसी चीज की जरूरत ही ना पड़ें या हो सकता है कि सब काम आ जाए। इसलिए सब चीजे रख लो कुछ भूलना मत।

गोलू और प्रभु का तो बिल्कुल भी जाने का मन नही था। पर 5 बजते ही सब दादी से पड़ौस में खेलने की बात बोल कर निकल लिए।

गर्मी के दिन थे। और 5 बजे भी भयंकर धूप थी। सब मुंह पर कपड़ा बांध कर घर से निकले। रास्तें में एक दो गांववालों ने सातों को एक साथ ऐसे जाते देख पूछ ही लिया कि कहां जा रहे हो। पर सब को एक ही जवाब मिला। ऐसे ही घूम रहे है गांव में।

छाँव में बैठ-बैठ कर टीले तक पहुँचने में कुछ टाइम लगा दिया। वो जैसे ही उस टीले के पास पहुँचे। वहां दुबारा तेज हवा घूम-घूम कर चलने लगी। रानो और चन्दू को छोड़ सब चिल्लाये।

सोनू ने कहा – ““देखो भूत वापस आ गया। लौट चलो|”

रानो ने कहा – ““रूको मुझे देखने दो|”””

जिस तरफ से हवा घूम घूम कर उठ रही थी। रानो उस तरफ गई। रानो ने दो-तीन मिनट वहां देखा। फिर टीले से नीचे उतर कर देखा। सारे भाई चुपचाप रानो को देख रहे थे।

गोलू ने कहा – ““रानो दी को डर नही लग रहा वो भूत के पास जा रही है।””

चन्दू ने कहा- ““चुपचाप देखो।””

फिर रानो हंसने लगी और बोली – ““लो आपका पहला भूत तो यही मारा गया।””

““मारा गया ? वो कैसे ?” ” – सोनू ने कहा।

““देखो मैं आपको दिखाती हूँ” ” – रानो ने मिट्टी उठाकर उड़ायी और कहा – ““देखो ये मिट्टी किस तरफ जा रही है।” ”

सबने देखा कि आगे कुछ टीले अर्धचंद्राकार आकृति में थे। हवा उस तरफ ही जा रही थी।

रानो ने कहा – ““जब हवा दो तरफ से या चार तरफ से आकर मिलती है तो अपने आप इस तरीके से चकरी की तरह घूमदार हवा के बवंडर बनते है। ये जब बड़े स्तर पर होते है तो इसे चक्रवात कहा जाता है। देखो खुद अपनी आंखो से। ये कोई भूत नही है केवल हवा है।””

चन्दू ने कहा – ““देखा, मैं एकदम सही कह रहा था। चलो अब पुरानी हवेली का भूत भी देख कर आते है।””

दीनू ने कहा – ““पर दीदी एक बात बोलूं। अभी हमें वहां भूत नही मिलेगा।””

““क्यों ?” ”

““आपको पता नही। भूतों की शक्तियां रात में ज्यादा ताकतवर होती है। और रात में ही वो बाहर निकलते है।””

““अच्छा। तो इस हिसाब से तो वो हमें पुरानी हवेली में ही मिलना चाहिए। बेचारा भूत इतनी गर्मी में कहीं घूमने थोड़े ही गया होगा। वो तो रात को ही निकलेगा ना। और वैसे भी इतना तो तुम्हे भी पता होगा कि भूतों के बारे में कहा जाता है कि वो एक ही जगह पर रहते है। और वैसे अगर तुम चाहते हो कि मैं रात के 12 बजे आऊँ तो मैं उसके लिए भी तैयार हूँ।””

““अरे नही, नही। रानो दी। ये तो पागल है। आप इसकी बात पर ध्यान मत दो। कल रात भी दीनू और प्रभु ने ही बात बढ़ा दी। आप चलो। अब कोई कुछ नही बोलेगा।”” – राजू ने कहा।

“हम्म, चलो जल्दी अब आगे। ”वैसे भी हम वहां हवेली का राज़ पता करने जा रहे है, उसके लिए दिन या रात की जरुरत नहीं है| वहां जाना जरुरी है|”- रानो ने कहा।

टीले के बाद श्मसान था। जहां पर आज किसी को नही जलाया गया था। पर वहां कुछ हड्डियां आज भी पड़ी थी। चारो तरफ सूनापन। सूखे पेड़ पौधे। उदासी और दुख का माहौल। उस माहौल को रानो ने देखा। और कहा – ““यहां आते ही सबका मन दुखी और उदास हो जाता होगा। क्योंकि श्मशान एक नकारात्मक ऊर्जा या नेगेटिव एनर्जी की जगह है। क्योंकि हर व्यक्ति यहां दुख लेकर ही आता है और दुख लेकर ही जाता है। जो हमारे अन्दर भी नेगेटिव विचार भर देती है इसलिए चलो यहां से।””

इसके बाद सब हवेली की तरफ चल दिए। हवेली पहुँचने के बाद रानो ने देखा कि हवेली सच में फिल्मों में दिखने वाली भूतिया हवेली की तरह है। रानो ने दीनू से कहा- ““अब तुम बताओ तुम्हे कहां से आवाज आई और कहां से क्या हुआ ?” ”

तब दीनू ने सब बताया। रानो ने कहा – “कौन मेरे साथ हवेली में अन्दर चलेगा ?” ”

चन्दू के अलावा किसी ने भी हां नही किया। तब रानो ने कहा – ““मैं उम्मीद करती हूँ, सब मेरे साथ ही चलेंगे। गोलू ,लाओ मुझे लाठी दो।” “चन्दू तुम ये चाकू पकड़ो। और सोनू भैया आप ये दूसरी लाठी और और गोलू प्रभु तुम गुलेल चलाने में एक्सपर्ट हो तुम ये ले लो।””

सोनू ने बोला – “ “तुम सबको इस तरह से सब को चीजे ले ने को कह रही थी हो जैसे तुम्हे पता है कि अन्दर हवेली में क्या है ? और उसका सामना करने में ये सब चीजे हमारे काम आएंगी।” ”

हां भैया, जो जगह आपके लिए भूतहा होती है, कभी कभी किसी के लिए वो जगह स्वर्ग होती है। इसलिए कह रही हूँ। अब चले। और हां नीचे पैर रखने से पहले देख लेना कि कहीं कोई सांप का बिल ना हो। कोई भूत का तो पता नही पर वो नुकसान जरूर पहुँचाता है।”” – इतना कह कर रानो सबसे आगे चल रही थी।

जमीन पर पत्तों को लाठी से साफ करते हुए और जमीन को दबाते हुए वो चल रही थी। हवेली में जाकर उन्होंने देखा कि हवेली के कुछ कमरे सही सलामत थे। रानो उस तरफ बढ़ी। सब चुपचाप उसके पीछे थे। एक कोने में सुनसान सी जगह थी। जिसके लिए जमीन के नीचे सीढ़िया जा रही थी। और जहां दिन में भी बहुत ज्यादा अंधेरा था। रानो उस तरफ बढ़ी। अचानक दूर से किसी के पत्तों में घुसने की आवाज आई। कोई भूत का नाम लेता इससे पहले ही गोलू ने कहा – ““नेवला है भैया।””

रानो ने कहा- ““फिर तो सांप से डरने की कोई बात नही।” ”

आगे जब वो उस अंधेरी सी जगह पर पहुँचे तो किसी की रहस्यमयी हंसी वापस आने लगी। और अंधेरे में पहले दो, फिर चार आंखे चमक उठी। उस दृश्य को देखते ही रानो सहित सब डर के मारे वहां से भागे। गोलू सबसे पीछे था। वो गिर गया। रानो ने उसे जल्दी से उठाया और सब हवेली से बाहर आए। सब के दिल डर के कारण जोर जोर से धड़क रहे थे| सब भागने वाले थे पर रानो ने सबको रोका। और कहा – ““रूक जाओ। वहां भूत नही है।””

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“अरे दीदी। अभी तो हमने अपनी आंखो से देखा कि वहां वही डरावनी हंसी और वो खतरनाक भूत की चार आंखे थी।” – राजू ने कहा |

रानो ने कहा – ““डर तो मैं भी गई थी। पर वो अचानक ऐसा दृश्य देखने से डरना स्वभाविक है। और फिर सब एक साथ डरते है तो दिमाग काम करना बंद कर देता है। इसलिए मैं भी वहां से भागी।””

““अब लौट चलते है दी।” – प्रभु ने कहा।

““नही, अब तो सच मेरे सामने आ गया है। मुझे बस तुम्हे दिखाना है। चलो वहां भूत नही है।”” – रानो ने कहा।

““हां दी। मुझे ये आवाज जानी पहचानी लगी है जैसे मैंने कहीं सुनी हो। हां शायद ये आवाज ……… ” ” चन्दू पूरी बात कहता इससे पहले ही रानो ने उसे चुप रहने का इशारा किया।

रानो ने गोलू और प्रभु से कहा कि सूखे पत्तों को उठा ले और जैसे ही वो बोले माचिस से उसमें आग लगाता जाए।

पानी पीकर सब दुबारा उस तरफ गए। रानो ने कहा कि अपनी लाठी, गुलेल, चाकू सब तैयार रखना। और उस सुनसान जगह पर जाते ही वापस वो हंसी गुंजने लगी। और वो आँखे चमक उठी।

रानो ने कहा- ““सबको कसम है जो कोई भी भागा तो अब बस कुछ ही सेकिंड में पता लग जाएगा कि हवेली में कौन हंसता है? अगर आज भाग गये तो हमेशा डरते रहोगे|”

रानो ने पत्ते जलाने का इशारा किया और नीचे की तरफ फेंका। और सबने देखा कि .. . .

वहां दो लकड़बग्घे थे, जिसे जरख भी कहा जाता है। और जो अपनी रहस्यमयी इंसानी हंसी के लिए प्रसिद्ध है। उन सब को देखकर वो सजग हो गए और और डरावनी आवाजे निकालने लगे।

रानो ने देखा कि वो उनकी तरफ आ रहे है तो रानो ने कहा कि सब धीरे धीरे पीछे चलो। कोई भी भागने की कोशिश मत करना। और वो उजाले की तरफ आ गए। वो उनकी तरफ आक्रामक मुद्रा में थे।

रानो ने कहा – ““चलो बचपन से लेकर आज तक जितनी भी फिल्में देखी और उनमें जैसे लड़ना देखा है आज दिखा दो।””

तब गोलू और प्रभु ने गुलेल से मारना शुरू किया। और इधर सोनू और रानो ने लाठी संभाल ली। बाकी सब ने भी आस पास से लकड़ियां इकट्ठी कर ली। कुछ ही देर में उन जानवरों को समझ आ गया कि वो इनसे नही जीत सकते तो वो वहां से निकल गए।

रानो ने कहा – “ “देखा ये है तुम्हारा भूत। मैं बता दूँ लकड़बग्घा कुत्ता प्रजाति का एक जानवर है। जैसे भेड़िया, लोमड़ी होते है। ये जब भोजन खाता है तो खुशी में हंसता है। ये एक परिवार है जो सुनसान जगह देखकर यहां रहने लगे होंगे। वरना अक्सर ये झुंड में रहते है। और शेर तक को अपना शिकार छोड़ने पर मजबूर कर देते है।

और इसके अलावा तुमने कहा था कि अचानक हवाएं चलने लगी तो याद रखों आंधी या तूफान वायुदाब की वजह से ही आता है यानि जहां पर हवा बिल्कुल बंद हो जाती है, आंधी तूफान आने की संभावना सबसे ज्यादा वहीं होती है। तो अब समझ आया कि भूत है या नही।””

चंदू ने कहा – “मैंने भी टीवी पर डिस्कवरी में देखा और सुना था इस जानवर की हंसी को| इसलिए मुझे अंदाजा हो गया था की ये जरुर लकडबग्घा ही है, भूत नहीं| हमें जहाँ तक हो सके सच पता किये बिना मन से ही हमें किसी चीज़ का भूत नहीं बनाना चाहिए|

गोलू ने कहा – ““दी आपने एक दम सही कहा था कि आप अगर पहले ही किसी चीज से डर जाओगे। और उसकी सच्चाई पता करने की कोशिश नही करोगे तो वो आपके सामने भूत बन जाएगी। भूत केवल हमारे मन का एक डर है, जैसे हम कहते है ना परीक्षा का भूत। ”

““वाह। क्या बात है गोलू।”” – रानो ने गोलू को गले लगाया। और फिर सारे भाई बहिन एक साथ गले लग गए।

रानो खुश थी कि पुरानी हवेली के राज का पता लगाने के उसके कदम ने उसके भाइयों के मन से भूत का डर हटा दिया।

सोनू ने कहा – ““हम गांव वालों ने बिना बात ही पुरानी हवेली का भूत बना रखा था। अब हम भी सब गांव वालों को पुरानी हवेली का राज बतांएगे। और इस जगह को किसी काम के लायक बनाएंगे। ना जाने कितनी ऐसी जगह है जो इस भूत के डर के मारे किसी के भी काम नही आती है ?””

आज सूरज ढल रहा था। पर उन सब के लिए ये एक नया उदय था।

भूत होते है या नही ? ये विवाद का विषय हो सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि यदि हम सच्चाई का पता नही लगाएंगे तो ऐसी जगह हमारे मन में हमेशा डर और खौफ बन कर रहती है। इस बारे में आपके क्या विचार है ? आपको यह कहानी  best horror story hindi purani haweli ka raaz part 3 (पुरानी हवेली की राज़ भाग 3) कैसी लगी ?

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