best horror story hindi purani haweli ka raaz part 2 (पुरानी हवेली की राज़ भाग 2)

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best horror story hindi purani haweli ka raaz  part 2 (पुरानी हवेली की राज़ भाग 2)

इस कहानी को समझने के लिए मेरी प्रोफाइल पर जा कर इस कहानी का पहला भाग यहाँ click कर के जरुर पढ़े – best horror story hindi purani haweli ka raaz

पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि चंदू और रानो अपने मामा के घर आएं है, चंदू एक दिन घूमते हुए एक टीले की तरफ जा रहा था तभी  दीनू उसे रोक लेता है| बाद में रात को छत पर दीनू और उसके चाचा ताऊ के लड़के मिल कर  रानो और चंदू को टीले का बारे में बताते है | उस टीले के बाद एक श्मशान था और उसके बाद पेड़ो के बीच एक पुरानी हवेली थी|  वहां पहुँच कर उन्होंने क्या देखा जाने के लिए पढ़िए best horror story hindi purani haweli ka raaz (पुरानी हवेली की राज़ भाग 2)

“ दूर से हम जिसे एक पुरानी हवेली समझ रहे थे। वो हवेली कम और भूत बंगला ज्यादा लग रही थी। उसकी बहुत सी दीवारे टूटी हुई थी। जैसे किसी ने उसे तोड़ा हो। उसकी दीवारों पर आग के निशान थे। मेरा मतलब जैसे आग से जलने पर दीवारे काली हो जाती है, उसी तरह वहां की दीवारें काली हो रही थी। चारो तरफ एक अजीब से उदासी का माहौल था। हर तरफ सन्नाटा था और इस सन्नाटे में केवल हमारी आवाजें ही गूंज रही थी। हवा का नामोनिशान नही था।

लेकिन जैसे ही हम उस हवेली की तरफ बढ़ने ही वाले थे कि हमें किसी के चलने की आवाज आई। हमने चारो तरफ देखा पर वहां कोई नही था। अचानक वहां का मौसम बदलने लगा। और तेज हवांए चलने लगी। सारे पेड़ पौधे जैसे हमसे हिल हिल कर कह रहे हो यहां से लौट जाओ। गोलू और प्रभु ने तो मना किया कि अब हमें वापस चलना चाहिए। पर सोनू भैया ने कहा कि यहां तक आएं है तो हवेली के अन्दर भी होकर आते है। मैंने कहा कि मुझे यहां अजीब सा महसूस हो रहा है।

पर भैया, नही माने। सोनू भैया उस हवेली की टूटी हुई चारदीवारी से अन्दर घुसने ही वाले थे कि वहां किसी के अजीब से हंसने की आवाज आने लगी। वो आवाज आज भी मेरे कानों में ताजा है। कितनी भयानक और डरावनी हंसी थी। ऐसी हंसी हमने इससे पहले कभी नही सुनी थी। उस आवाज ने तो हमें और दहशत में ला दिया।

हम सब एक साथ चिल्लाये – “भूत भूत भागो यहां से . . . ”

बिना देर किए हम सिर पर पैर रख कर वहां से भागे। सोनू भैया ने जितनी जल्दी उस हवेली में घुसने में दिखाई थी, उससे ज्यादा तेजी से वो भागे।

उसी समय हमें लगा कि वो हंसने वाला जो भी था वो हमारी तरफ ही आ रहा था। क्योंकि हमें हमारे पीछे किसी के चलने का अहसास हो रहा था। ”

“फिर तुमने पीछे मुड़कर नही देखा।”- रानो ने पूछा |

“अरे दीदी। ऐसा भूलकर भी नही करना चाहिए। दादी कहती है कि जब भी सुनसान रास्तों से गुजरों और कभी पीछे से आवाज आए तो कभी भी उस पर ध्यान नही देना चाहिए। क्योंकि भूत हमेशा पीछे से आवाज देते है और अगर हमने पीछे मुड़ कर देख लिया तो फिर वो हमारे पीछे लग जाते है। और वैसे भी दीदी जब आपको पता है कि भूत आपके पीछे है। और खतरनाक हंसी हंस कर हमारा पीछा कर रहा है। तो उसकी शक्ल देखकर हम क्या करेंगे ? उसकी शक्ल देखकर तो हम वहीं के वहीं मर जाते।” – दीनू ने कहा।

“हां सही कहा दीनू। फिर आगे क्या हुआ ? ”- चन्दू ने हामी में सिर हिलाते हुए कहा।

दीनू जैसे वापस उस घटनाक्रम में पहुँच गया हो। उसने आंखे बंद करके बताना शुरू किया – “हम बिना पीछे देखे भाग रहे थे। और वो तेज हवाएं आंधी में बदलने लगी थी। सांय सांय की आवाज करती वो हवाएं चल रही थी। हम बस भगवान का नाम लिए वहां से भागे जा रहे थे। उस जंगल को पार कर जब हम श्मशान की तरफ पहुँचे तो देखा कि वहां चिता जल रही थी जिसकी आग ने भयंकर रूप ले लिया था।

उस दृश्य को देखकर तो हमारे हाथ पैर और कांपने लगे। हम डरते डरते वहां से भागे। और टीले को पार कर के खेतों की तरफ उतर आए। वहां जाकर रूके। क्योंकि हमारी सांस फूल गई थी। बहुत ज्यादा थक चुके थे। दूर दूर तक कोई नजर भी नही आ रहा था। डर और दौड़ने की वजह से सर्दी में भी हम पसीना पसीना हो गए थे। सब चुपचाप दहशत में एक दूसरे को देख रहे थे।”

“अच्छा फिर मामा जी कब आए।” – चन्दू ने पूछा।

“अरे यार। चन्दू तुम सवाल बहुत पूछते हो ? अभी तो और भी कुछ होना बाकी था।” – दीनू ने कहा।

“और भी ?? ”- चन्दू ने कहा। उसने और भी अधिक आश्चर्य से पूछा।

“हम्म, सुनो। हम चुपचाप बैठ गए थे। तेज हवा में अपना पसीना सुखाने में लगे थे। दहशत की वजह से हमारे पूरे शरीर में कंपकंपी हो रही थी। अचानक गोलू ने रोते हुए कहा – ‘लगता है भूत हमारा पीछा नही छोड़ रहा भैया। वो हमें मार कर ही छोड़ेगा।’

सोने भैया ने कहा- “अरे गोलू अब कुछ नही होगा। अब तो हम वहां से बहुत दूर आ गए है।”

“पर भूत ने हमारा पीछा नही छोड़ा है वो देखो” – गोलू ने हाथ से हवेली की दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

हमने देखा उस हवेली की तरफ से अचानक काले काले बादल उठ कर हमारी तरफ ही आ रहे थे। सूरज डूब चुका था और हल्का अंधेरा गहराने लगा था। पर इन बादलों की वजह से बहुत जल्दी अंधेरा हो गया था।

उसे देखते ही तो हम भागने के लिए पीछे मुड़े और पीछे देखते ही तो हमारी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। हमने देखा कि सामने पापा, और दोनो ताऊ जी और साथ में 3-4 लोग हाथों में लाठी लिए हमारी तरफ आ रहे थे। सच में भैया उस दिन का मंजर तो आज तक आंखो में ताजा है। भूत के डर से पीछा छूटा ही था कि पिटाई का डर।

इतना कहकर दीनू चुप हो गया।

“फिर क्या हुआ ? ” – इस बार रानो ने पूछा ।

“प्यास लग रही है यार। कोई पानी तो पिलाओ। बोल बोल कर गला सूख गया।” – दीनू ने कहा।

“लो, मैं लेकर आई थी। ये लो ” – रानो ने उसे बोतल दी।

“लाओ दी।”- और दीनू गटागट आधी बोतल पी गया। सब उसकी तरफ देखते ही रह गए। उसके बाद उसने गोलू को दी। क्योंकि वो सबसे छोटा था। और फिर सब ने एक एक घूंट पानी पिया।

“तो चलो। अब आगे बताओ। सच में बहुत मजा आ रहा है आज ये बाते सुनकर।” – रानो ने कहा।

आगे ज्यादा कुछ नही हुआ। ताऊजी ने हम सबको एक एक चपत लगाई । और फिर पूछा – “कहां गए थे ? पता है। उधर श्मशान है।”

हम सब डर के मारे चुप थे पर इस गोलू ने मासूमियत से बोल दिया – “ हां देखा हमने ? वहां आग भी जल रही थी।”

“और फिर तो जो हम पिटे वो पूछो मत। वो तो अच्छा हुआ कि ताऊजी ने इतना जानकर वहीं पीटना शुरू कर दिया था और सोनू भैया ने चुप करने का इशारा कर दिया था। वरना ये तो सारी कहानी सुना देता।”

“अरे तो मैं तो बच्चा था ना।” – गोलू ने कहा।

“तू तो अभी भी बच्चा ही है। हा हा हा ” – सोनू भैया ने हंसते हुए कहा।

“दीनू तुम आगे बताओ। घर पर क्या हुआ ? ” – रानो ने कहा।

“घर आते ही सबसे पहले इतनी ठंड में हमें नहलाया।” – दीनू ने कहा।

“गंदे हो गए थे इसलिए। मतलब मामी जी भी मम्मी की तरह गंदगी पसंद नही करती।” – चन्दू ने कहा।

“अरे नही बुद्धु । श्मसान में जाना अशुभ मानते है ना। और दूसरी बात कोई बुरी आत्मा पीछे पड़ जाए तो। दादी तो बहुत ज्यादा दुखी थी। बार बार भगवान का नाम लिए जा रही थी। और भगवान से हमारी रक्षा करने की प्रार्थना कर रही थी। उनका मानना था कि श्मशान की कोई बुरी आत्मा उनके बच्चों के पीछे ना पड़ गई हो।”

“और पापा और ताऊजी ने मिलकर हम सब को जो पीटा है वो तो पूछो ही मत।” -दीनू ने अपने गाल पर हाथ रखते हुए कहा।

“गोलू सबसे छोटा था ना फिर भी उसे मारा ? ”- चन्दू ने पूछा।

“हाँ, ताऊजी मारते टाइम ये नही देखते कि बच्चा है या बड़ा। उसे भी मार पड़ी। ” -सोनू ने कहा।

“और जबकि मैंने तो कितना मना किया था इन सब को।” – गोलू ने कहा।

“और उस दिन से हमने कसम खा ली है चन्दू कि हम उस तरफ कभी नही जाएंगे। और तुम भी कभी मत जाना” – राजू ने कहा।

“अब बोलो तुम्हे डर नही लगा।” – सोनू ने चन्दू से पूछा।

“डर, हा हा हा। भैया इसमें डर की क्या बात है ? आपके साथ जो हुआ उसमें अधिकतर तो प्रकृति की घटनाएं थी। मैं तो अभी भी नही मानता। कि वहां भूत वूत कुछ होगा”। – चन्दू ने हंसते हुए कहा।

“तुम शहर में पढ़े हो ना। इसलिए ऐसा नही मानते। तुम उस दिन हमारे साथ आते ना। तो सारी पढ़ाई लिखाई भूल जाते। ”- सोनू ने कहा।

“और हां भैया, भूत होते है। आपके मानने या ना मानने से कुछ नही होता।” – दीनू ने कहा।

“अरे मेरे प्यारे भाइयों। उस वक्त तो आप सब 6 से 14 साल के बच्चे थे। पर अब तो गोलू को छोड़ कर सब 15-16 साल से ज्यादा के हो गए हो। और सोनू भैया आप तो हम सबमें सबसे बड़े हो। आपको तो ऐसी बातों पर विश्वास नही करना चाहिए।” – रानो ने कहा।

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best horror story hindi purani haweli ka raaz (पुरानी हवेली की राज़ भाग 2)

“ हा हा हा, रानो 20 साल उमर हो जाने से क्या भूत दिखते नही है। या भूत 20 साल के लड़के से डर जाते है।” – सोनू ने हंसते हुए कहा।

“देखो, इसका जवाब तो मुझे नही पता। पर आप अगर पहले ही किसी चीज से डर जाओगे। और उसकी सच्चाई पता करने की कोशिश नही करोगे तो वो आपके सामने भूत बन जाएगी।” – रानो ने कहा।

“अच्छा तो दी, हम पांचो ने जो महसूस किया। जो देखा। क्या वो सब झूठ है ? ” – दीनू ने पूछा।

“जो देखा। जो हुआ। वो सब सच हो सकता है। पर बहुत बार सच के पीछे भी एक सच छुपा होता है। और उस सच को जाने बिना हमें ऐसी भूत-प्रेत की बातों पर विश्वास नही करना चाहिए।” – रानो ने कहा।

“तो मतलब अगर आप वहां होती तो उस शैतानी आवाज से डर कर नही भागती” – प्रभु ने कहा।

“हां नही भागती। बल्कि पता कर के आती कि वहां क्या है ? ”

“ये सब मरने के काम है ? क्यों बिना बात मुसीबत मोल लो।”

“तो क्या जिन्दगी भर इस डर से कि वहां भूत है, या भूत होते है। हम डर और खौफ में जीते रहे। ”

“अच्छा दी ! आप इतनी बहादुर है तो क्या आप उस हवेली में जा सकते हो ? ” – दीनू ने रानो की बहादुरी पर शक करते हुए कहा।

“हां जा सकती हूँ। वो भी अकेले। मैं भी तो देखूं वहा। कौनसा भूत है ? ” – रानो ने अपनी आवाज का अंदाज बदलते हुए कहा।

“अरे दीनू। ये बातें अब अलग ही दिशा में जा रही है। छोड़ो इस बात को।” – सोनू ने कहा।

“नही, भैया ! आप सब लड़को को ना जाने क्यों लगता है कि लड़कियाँ डरपोक होती है ? और मैं अपने मम्मी पापा और भगवान के अलावा किसी से नही डरती हूँ। और आपको डर लगता है इसलिए वहां जाना आपके लिए इतनी बड़ी बात है। मेरे लिए नही।” – रानो ने अपनी गर्दन ना में हिलाते हुए कहा।

“चन्दू अब तुम ही समझाओ। रानो दी को। क्यों अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मार रही है ? वहां जाने की बात कह कर। ये दीनू तो पागल है कुछ भी बोल देता है|” – राजू ने कहा।

“दी सही बोल रही हैं और मुझे भी वहां जाने से कोई डर नही लगता है।” – चन्दू ने अपनी बहन का साथ देते हुए कहा।

“अरे छोड़ो। ये सब बाते। रात बहुत हो गई है। सोने चलो सब। मैं तो अब अकेला जा भी नही पाऊँगा।” – गोलू ने डरते हुए कहा।

“देखा, आपने गोलू को। बचपन से ऐसी भूत प्रेत की बाते किसी बच्चों के मन में भरेंगे तो उससे तो डर ही लगेगा ना। गोलू चिंता मत करो। कल मैं उस हवेली का राज पता कर के आऊँगी।” – रानो ने गोलू को अपने पास बुलाते हुए कहा।

“अरे रानो छोड़ो। मम्मी, पापा और बुआजी को पता लग गया तो हमारी जान ले लेंगी। चलो सोते है अब।” – सोनू ने खड़े होते हुए कहा।

“इतना विश्वास और बहादुरी भी अच्छी नही होती है कि खुद को ही मुसीबत में डाल लो।” – दीनू ने कहा।

“अब तो मैं पक्का कल वहां जाऊँगी। और अब आप सबको अपनी इस इकलौती बहन की कसम है जो किसी ने भी मुझे जाने से रोकने की बात की” – रानो ने भी खड़े होते हुए कहा।

“ये क्या बोल दिया तुमने रानो ? ये प्रभु और दीनू तो तुमसे छोटे है। मेरे बाद तो तुम सबसे बड़ी हो। अब तुमने कसम दे दी है तो कोई बात नही। लेकिन तुम अकेले नही जाओगी। हम सब भी तुम्हारे साथ जाएंगे। ”- सोनू ने दीनू और प्रभु की तरफ देखते हुए कहा।

“हम भी ? ” – दीनू, राजू, प्रभु और गोलू एक साथ बोले।

“हाँ, ये बात इस हद तक तुम्हारी वजह से ही पहुँची है कि रानो को अपनी कसम देनी पड़ी। और तुम सब जानते हो रानो बचपन से जिद्दी है। एक बार उसने सोच लिया कि उसे ये करना है तो फिर वो उसे करके ही रहती है। फिर भी तुमने ही उसे उकसाया। और वो हमारी बहन है तो उसका साथ देना हमारा भी फर्ज है। कल सब तैयार रहना। चलों अब सब सोने चलो। मैं नही चाहता कि बात और ज्यादा बढ़े।” – सोनू ने सबको चुपचाप सीढ़ियों की तरफ जाने का इशारा करते हुए कहा।

“पर . . . भैया | ” – दीनू कुछ बोलना चाहता था पर उसकी हिम्मत नही हुई। दीनू और प्रभु को अपने ऊपर गुस्सा आ रहा था। वो तो केवल रानो दी को चिढ़ाने और डराने के लिए बोल रहे थे। पर यहां तो बात कहां से कहां पहुँच गई ? दोनो के मन में उस दिन वाली वो खौफनाक हंसी गूंजने लगी।

शेष आगे . . .

आगे क्या हुआ ?क्या वो सब दुबारा उस पुरानी हवेली में जाते है ? पुरानी हवेली का क्या राज़ है ?  क्या रानो को वहां सच में भूत मिला ? आखिर उस हवेली का राज़ क्या था ? क्या वहां जा कर रानो ने गलत तो नहीं किया ?

ये सब जानने के लिए पढ़िए इस कहानी का सबसे रोचक और अंतिम भाग  best horror story hindi purani haweli ka raaz (पुरानी हवेली की राज़ भाग 3 ) 

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