best horror story hindi purani haweli ka raaz part 1( पुरानी हवेली का राज़ भाग 1)

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best horror story hindi purani haweli ka raaz part 1

भूत होते है या नहीं होते ? ये एक विचार और विवाद का विषय है | आज की  ये कहानी best horror story hindi purani haweli ka raaz part 1 मेरे द्वारा लिखी गई रहस्य रोमांच से भरी हुई पहली स्वरचित कहानी  है| पूरी पढ़े और अंत में प्रतिक्रिया अवश्य दें| ताकि इसका अगला भाग शीघ्र आपके सामने ला सकूँ|

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 best horror story hindi purani haweli ka raaz part 1

“अरे चन्दू ! रूक जा। उस तरफ मत जा।” – राजू ने चन्दू को एक टीले पर चढ़ते देख कर कहा।

“ क्यों ? क्या हुआ ? “- चन्दू के पैर वहीं रूक गए।

“ मम्मी-पापा, दादी सब मना करते है उधर जाने से।” – राजू ने उसके पास आकर कहा।

“ क्यों यार ? ऐसा क्या है वहां पर ?”- वो उस तरफ जाने लगा।

“रूक जा राजू। पता तो मुझे भी नही है लेकिन एक बार मैं और मेरे दोस्त यही देखने के लिए उस तरफ चले गए थे। तब गांव के ही किसी आदमी ने हमें देख लिया और उसने पापा को बता दिया। और हमारे पहुँचने से पहले ही पापा ने हमें पकड़ लिया।” – राजू ने चन्दू का हाथ पकड़ते हुए कहा।

“और फिर जो मार पड़ी है वो पूछो मत। और मेरी तो गलती भी नही थी। मैंने तो इन सबको रोका भी था। पर साथ था इसलिए मुझे भी मार पड़ी।” – गोलू ने चन्दू के आगे खड़े होकर कहा।

“उस दिन से हमने कसम खा ली है। कभी उस तरफ नही जाएंगे।” – राजू ने कहा।

“पर बात क्या है ? यार कुछ बताओगे।” – चन्दू ने पूछा।

“सब अलग अलग कहते है यार। कोई कहता है दूसरी तरफ बहुत बड़ी खाई है। कोई कहता है कि वहां एक बहुत बड़ा सांप है जो बड़े से बड़े जानवरो को खा जाता है। कोई कहता है वहां भूत है।” – राजू ने कहा।

“भूत हा हा हा हा। अरे भूत वूत कुछ नही होता। सब डराने के लिए बोलते है।” – चन्दू ने हंसते हुए कहा।

“तुम्हे तो मजाक ही लगेगा। शहर से जो आए हो। शहर के लोग इन बातों पर भरोसा ही नही करते है।” – गोलू ने कहा।

“अरे सच में यार। ये सब डराने के लिए बोला जाता है।” – चन्दू ने कहा।

“हाँ, ठीक है मान ली तुम्हारी बात। पर अभी तुम यहां से चलो। किसी ने इस टीले के आसपास भी देख लिया तो तुम्हारा तो पता नही। पर हम जरूर पिट जाएंगे।” – राजू ने सब तरफ देखते हुए कहा। दूर दूर तक किसी इंसान तो छोड़ो किसी जानवर या पक्षी का भी नामोंनिशान नही था।

“अच्छा चलो ठीक है। नही जा रहा हूँ, उस तरफ। अब मुझे छोड़ो तो सही” – चन्दू ने राजू ने हाथ छुड़ाकर टीले से उतरते हुए कहा।

शाम होने का समय था। और चन्दू अपने ममेरे भाई राजू और गोलू के साथ घूमता-घूमता गांव से बाहर खेतों की तरफ आ गया था। खेतों के खत्म होने के बाद एक बड़ा सा टीला था, जिस पर चन्दू चढ़ने ही वाला था कि राजू और गोलू ने उसे रोक लिया।

चन्दू भले ही उस समय उनकी बात मान गया। पर उसके दिमाग में उस टीले के दूसरी तरफ क्या है ? ये जानने की इच्छा हो गई थी। लेकिन वो राजू और गोलू को दुबारा अपने मामा जी के हाथों मार नही पिटवाना चाहता था। इसलिए चुपचाप उनकी बात मान ली।

तीनो टीले से नीचे उतर रहे थे। कि तभी एक जोरदार हवां का बवंडर उठा और देखते ही देखते वो बड़ा होने लगा।

गोलू चिल्लाया – “ओह मम्मी, ये तो भूत आ गया। भागो यहाँ से।”

राजू ने कहा – “ये सब इस टीले के पास आने से हुआ है। चन्दू चलो | जल्दी भागो यहाँ से।”

चन्दू को भी समझ नही आया कि ये अचानक बवंडर कैसे उठ गया ? पर फिर भी उसने कहा – “अरे यार ये भूत नही है। हवा है जो कभी कभी चकरी की तरह घूमने लगती है। तुम सच में बहुत अंधविश्वासी हो।”

“हां, कुछ भी हो पर तुम चलो यहां से । बुआजी और दादी को पता चल गया तो वो तो हमारी खाल उधेड़ देंगी।” – राजू ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।

गोलू इस दौरान अकेला ही भाग निकला था और थोड़ी दूर निकल गया था।

“अरे डरपोक ! रूक जा। हम भी आ रहे है।” – राजू ने अपने भाई गोलू से कहा।

पर वो तब तक नही रूका, जब तक उसने गांव में प्रवेश नही कर लिया। तब तीनों एक साथ घर पहुँचे।

“क्यों ? कहां घूम कर आ रहे हो ? दिन भर से चैन नही है तुम्हे। जरा दोपहर में घर पर आराम कर ले। और जरा कपड़े देखों तीनों के। कहां मिट्टी में खेलकर आए हो ?” – रामेश्वरी देवी ने कहा।

दादी के इतने सारे सवाल एक साथ सुनकर राजू ओर गोलू से तो कुछ बोलते नही बना। पर चन्दू जानता था कि उसे अपनी नानी को कैसे मनाना है ?

“ ओह! मेरी प्यारी नानी। कुछ ही दिनों की बात तो हैं अभी छुट्टियां है| खेल लेने दो हमें। फिर तो स्कूल शुरू होने के बाद कौनसा खेलेंगे हम ? प्लीज नानी।” – चन्दू ने नानी के गले लगते हुए कहा।

“ठीक है बिटुआ। पर तू ज्यादा बाहर मत खेला कर । ये तो गांव में ही रहते है तो इन्हे तो आदत हैं तू तो शहर में पंखे कूलर में रहता है ना। तबीयत खराब हो जाएगी।” – रामेश्वरी देवी ने चन्दू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा। क्योंकि साल के कुछ दिनों के लिए ही चंदू और उसकी बहन रानो अपने नाना नानी से मिलने आते थे| और वो उनको किसी भी बात के लिए मना नहीं करना चाहती थी|

“और तुम सब के कपड़े कितने गंदे हो रहे है। जाओ। नहाकर आओ। पसीने और धूल से इन्फेंक्शन हो जाता है।” – चन्दू की मम्मी ने उन तीनो के कपडे देख कर कहा।

तीनों जल्दी से बाथरूम की तरफ चले गए।

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रात के 10 बज गए थे। और गांव के सभी मेहनतकश लोग सो चुके थे। औरते अपने सारे कामों को निपटाने में लगी थी। इधर राजू, गोलू और उसके ताऊजी का लड़का सोनू और राजू के चाचा के लड़के दीनू, प्रभु सब मिलकर चन्दू के साथ अपने-अपने अनुभव साझा करना चाहते थे। जब वो उस टीले के पास गए थे। इस समूह में लड़कियों को शामिल नही किया गया था क्योंकि वो तो होती ही डरपोक है। ऐसा इस समूह के लड़कों का मानना था।

सब के आने के बाद चर्चा प्रारम्भ होने ही वाली थी कि तभी चन्दू की बड़ी बहन रानो भी वहाँ आ गई।

“इसको किसने बुलाया यहाँ ?” – सोनू ने कहा। क्योंकि वो इस समूह में सबसे बड़ा था। और उत्तर के लिए सबकी निगाहें चन्दू की तरफ चली गई।

“मैंने तो नही बुलाया।” – चन्दू ने सबको अपनी तरफ घूरते हुए देखकर कहा।

“मुझे किसी ने नही बुलाया। मैं खुद आई हूँ। कुछ देर पहले जब तुम सब छत पर बैठकर भूत-प्रेत की बातें करने की योजना बना रहे थे तो मैंने चुपके से सुन लिया था। और हाँ मुझे वापस चले जाने को मत कहना वरना तुम्हारी ये सभा यही समाप्त हो जाएगी।”- रानो ने एक ही बार में ऐसा जवाब दिया था कि सबकी बोलती बंद हो गई थी।

सबने उसे बैठने का इशारा किया। क्योंकि सब जानते थे कि रानो ने अगर एक बार किसी चीज के बारे में सोच लिया तो फिर वो उसे कर के ही रहती है। वरना दूसरे का काम भी बिगाड़ देती है।

सोनू ने कहा – “आ तो गई हो पर सोच लो, कहीं बीच में से ही डर कर भाग ना जाओ।”

रानो ने कहा – “सोनू भाईसाब ! मैं लड़की हूँ पर इसका मतलब ये नही कि मैं डरपोक हूँ। खैर आप अपनी बातें शुरू कीजिए। मुझे तो सुनना है कि आपकी भूतप्रेतों के बारे में क्या राय है ?”

“तो सबसे पहले कौन शुरू करेगा। बोलो।” – सोनू ने कहा।

राजू ने कहा – “भैया, मैं शुरू करता हूँ।”

“ हम्म ” – सबने हामी भरी।

राजू ने कहना शुरू किया – “ आज तो सच में डर के कारण मेरे हाथ पैर कांपने लगे थे। जब वो भूत हमारे सामने खड़ा होने लगा था।”

“ अरे यार राजू ! वो भूत नही था। बस हवा का एक तेज चक्रवात जैसा उठा था। और कुछ नही था। इस साल हमनें इसके बारे में अपनी भूगोल की किताब में पढ़ा है।” – चन्दू ने राजू की बात को बीच में ही रोकते हुए कहा|

दीनू ने कहा – “चन्दू भैया। आपने बस किताबें ही किताबें पढ़ी है ना तो आप हर बात में अपना किताब का ज्ञान ला देते है। वो भूत ही था। हमने खुद ने उस दिन उसे महसूस किया था।”

रानों हंसने लगी – “अच्छा दीनू फिर क्या हुआ ? भूत तुझे साथ में नही ले गया।”

चन्दू ने कहा – “अरे हमारे दीनू भैया थोड़े काले है ना शायद इसलिए। भूत भी डर गया होगा|”

इस बात पर सब हंसने लगे। दीनू भी हंसने लगा क्योंकि वो सब भाई बहन थे और भाई बहन ऐसे मजाक कर ही लेते है|

“हंस लो रानो दी। जब भूत आएगा ना तो आप भी हंसना भूल जाओगे।” – दीनू हंसते हुए बोला।

“अच्छा, ये तो आज की बात हुई। पर इसके अलावा भी तुममें से कोई गया है उस तरफ।” – चन्दू ने कहा।

“हाँ, हम सब ही गए है।” – सोनू ने कहा।

“तो क्या हुआ था उस दिन ?” – रानो ने पूछा।

“अरे दीदी। उस दिन की तो पूछो ही मत। उस दिन की बात सोच कर तो आज भी हमारे हाथ पैर कांप जाते है।” – प्रभु जो अब तक चुप था। उसने अचानक कहा।

“क्यों ? ऐसा क्या था वहाँ ? और राजू और गोलू तो कह रहे थे कि वो उस टीले के पास पहुँचे ही नही थे। फिर क्या देख लिया तुम सबने ?”- चन्दू ने कहा।

सोनू ने कहा – “वो क्या है कि हम सब भाई एक ग्रुप में रहते है और एक बार अगर ग्रुप में किसी बात को बताने से मना कर दिया था। तो फिर अपने मम्मी पापा तक को वो बात नही बताई जाती है। इसलिए नही बताया होगा। खैर अब तुम दोनो भी हमारे ग्रुप में हो और आज सब साथ है तो तुम्हे बता रहे है लेकिन उम्मीद करते है | तुम भी इस बात को ग्रुप से बाहर नही जाने दोगे।”

“हम्म”- चन्दू और रानो ने हामी भरते हुए कहा।

“अब सारी कहानी तुम्हे दीनू सुनाएगा। क्योंकि इसके सुनाने का अंदाज सबसे अच्छा है।” – सोनू ने कहा।

दीनू ने तब अपने अंदाज में सुनाना शुरू किया।

“ये सर्दियों की छुट्टियों की बात है। घर और मोहल्ले में खेलते-खेलते हम थक चुके थे। ना जाने हमारे दिमाग में कौनसा कीड़ा काटा जिसने हमें मजबूर किया कि हमें गांव के बाहर भी घूम कर आना चाहिए। क्योंकि अब हम सब 10 साल से ज्यादा के हो गए है। और कभी गाँव से बाहर नहीं निकले थे | यही सोच कर हम गांव से बाहर निकल आए।

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वहां हरे भरे खेतों के बीच हमें इधर से उधर दोड़े। कहीं से गाजर, कहीं से मूली निकाल निकाल कर खाई। और इसी बीच हमें पता ही नही चला कि कब हम उस टीले की तरफ पहुंच गए।”

“अच्छा फिर क्या हुआ ? क्या देखा तुमने वहाँ” – चन्दू ने पूछा।

“अरे यार, बीच में मत बोलो सब बताऊँगा।” – दीनू ने उसे चुप रहने का इशारा करते हुए कहा – “हम उस टीले की तरफ बढ़ने ही वाले थे कि पीछे से एक आवाज आई – ‘रूकों। अपनी जान की खैर चाहते हो तो वापस लौट जाओ।’

हमने पीछे मुड़ कर देखा तो एक बूढ़ी सी औरत लाठी लिए वहां खड़ी थी। हमने उसे गौर से देखा पर वो हमें अपने गांव की नही लगी। वो औरत हमारे पास आ गई और बोली – ‘अपने मैया बापू से पूछे बिना यहां आए हो। कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा ? लौट जाओ यहां से।’

‘पर अम्मा यहां है क्या ?’ – सोनू भैया ने पूछा।

तो वो बूढ़ी औरत बोली – ‘अगर जान तो लोगे। लेकिन किसी और को बताने लायक नही रहोगे। लौट जाओ।’

‘चलो भैया। हम घर पर किसी को बता कर भी नही आए है। और ये बात इस अम्मा को भी पता है।’ – गोलू ने कहा।

तब हम सब लौट कर आने लगे। कुछ दूर जाने के बाद हमने पीछे मुड़ कर देखा तो वो औरत गायब हो चुकी थी। पर उस समय सूरज उस पहाड़ी के पीछे छुपने वाला था। तो प्रभु ने हम से कहा कि देखो उस टीले के पीछे जाता वो सूरज कितना अच्छा लग रहा है?

तब मैंने कहा कि क्यों ना आज देखे कि सूरज उस टीले के पीछे कहां जाकर छुपता है ? और हम सब फिर उस टीले पर चढ़ गए। उस टीले के पार जो हमने देखा तो हमारी आंखे खुली की खुली रह गई।

शायद वो श्मसान था। वहां किसी को जलाया ही था जिसकी हड्डियां वहाँ पड़ी हुई थी। जिसमें से धुआं उठ रहा था। बहुत सी जगह राख के ढेर ही ढेर लगे थे। अजीब सा दुखी सा माहौल लग रहा था वहां। हर तरफ सूनापन। कोई भी जानवर और पक्षी नजर नहीं आ रहा था| पेड़-पौधे सूख रहे थे। और सन सन करती हंवाए चल रही थी। और बहुत ही भयानक माहौल था वहां का।”

रानो और चन्दू बहुत ध्यान से सुन रहे थे। चन्दू ने ना चाहते हुए भी पूछ लिया- “फिर तुम वापस आ गए वहां से”

“सब बताता हूँ सुनो। इस माहौल के बीच हमने देखा कि दूर पेड़ो के झुरमुट के बीच कहीं कोई पुराना मकान या हवेली जैसी है। गोलू और प्रभु तो बोलने लगे कि चलो अब वापस चलते है। लेकिन सोनू भैया को वो मकान देखना था। क्योंकि हम पहली बार गांव से बाहर आए थे और हमे पता नही था कि अगला मौका हमें कब मिलेगा ?

इसलिए सबसे पहले सोनू भैया उस श्मशान के एक तरफ से होते हुए पेड़ो की तरफ चल दिए। हम सब भी उनके पीछे पीछे चल दिए। वहां थोड़ी दूर जाने के बाद हमें वो हवेली पूरी नजर आई। वो चारो तरफ से बड़े बड़े पेड़ो से घिरी हुई थी। इसलिए दूर से देखने पर वो नजर नही आती थी। हम चुपचाप उस हवेली की तरफ गए। वहां का माहौल देखकर तो हम और भी ज्यादा घबरा गए।”

शेष अगले भाग में . . .

आगे क्या हुआ ? हवेली में उन सबने क्या देखा ? क्या वो सब दुबारा उस पुरानी हवेली में जाते है ? पुरानी हवेली का क्या राज़ है ? 

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